सन्नाटा भरा माहौल / प्रियांशी

दोपहर के वक़्त आलिया जब अपने दोस्तों के साथ स्कूल से घर आ रही थी तो देखा कि आज गली में अलग-सा सन्नाटा पसरा हुआ है। इधर-उधर देखने पर दिखाई दिया कि कुछ औरतें रोज़ाना की तरह अपने चबूतरे पर बैठकर बातचीत कर रही थी। पर आज कहीं भी वह शोर नहीं है। बच्चे भी खेलते हुए नहीं दिख रहे थे। ज़्यादातर लोगों की सीढ़ियाँ ख़ाली थीं और घर के दरवाज़े बंद थे। औरतें बातचीत तो कर रही थीं लेकिन सिर्फ़ उनके होंठ हिलते दिख रहे थे। आवाज़ तक सुनाई नहीं दे रही थी। बस, गली में दुकानवालों की आवाज़ें और आती-जाती रेहड़ी वालों की आवाज़ भर आ रही थी – सब्ज़ी ले लो, सब्ज़ी हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ। लेकिन आज सब्ज़ी लेने कोई भी अपने घर से बाहर नहीं निकल रहा था। आते-जाते लोगों की जूते-चप्पल की आवाज़ भर सुनाई दे रही थी।

गली में चलते वक़्त आज आलिया को ऐसा लग रहा था कि पता नहीं कौन-सी अनजानी गली में आ गए हैं। पहले उसे लगा कि शायद आज गली में कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वजह से इतनी शांति दिख रही है। वरना इतनी शांति तो मैंने कभी देखी नहीं। घर जाकर ही पता चलेगा कि गली इतनी शांत क्यों है। 

जब वह अपने घर की तरफ़ बढ़ी तो उसने देखा कि बगल वाले घर में हिना आंटी जो हमेशा अपने घर के बाहर ही बैठी रहती हैं, आज उनका भी दरवाज़ा बंद है। वहीं घर की दूसरी तरफ़ करिश्मा आंटी के दरवाज़े पर भीड़ लगी हुई है। ऐसा लग रहा था कि औरतें एक-एक करके उनके घर के अंदर जा रही हैं। गली में इस बदले माहौल को देख कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसका सर घूमने लगा।

जब वह अपने घर में वह घुसी तो उसने देखा कि आज मम्मी, बेड पर बैठकर फ़ोन चला रही हैं, वो भी लो-साउंड पर। वरना उसकी मम्मी तो स्पीकर लगाकर गाने बजाती हैं, जिसकी आवाज़ सीढ़ियों से ही सुनाई पड़ने लगता है। आलिया ने अपना बैग वहीं बेड पर रख दिया। फिर वह मम्मी के पास जाकर बैठी और बोली, मम्मी गली में क्या हो गया जो आज शांति नज़र आ रही है। मम्मी उसकी बात टालते हुए बोली, अरे कुछ नहीं हुआ, जा तू खाना खा ले। भूख लग गई होगी। नहीं मम्मी, अभी मुझे भूख नहीं लगी पहले आप यह तो बताओ कि आज गली में हुआ क्या है? वो तेरे जानने की बात नहीं है। कुछ भी हुआ हो तुझे हर जगह की ख़बर रखनी है क्या? यह कह मम्मी ने तो उसे वहीं बैठा दिया और उसके लिए खाना निकालने किचन में चली गईं।

आलिया सोचने लगी कि मम्मी इतना डाँट क्यों रही है? मैंने क्या ग़लत पूछ लिया? बस यही तो पूछा है कि गली में इतनी शांति क्यों है। ड्रेस चेंज करके उसने खाना खाया। खाना खाने के बाद वह फिर बोली, मम्मी बताओ ना क्या हुआ है! मुझे जानना है।  इस बार उसकी मम्मी ने आँखें दिखा कर उसे डराने की कोशिश की। और बोलीं, एक बार में समझ नहीं आता। कह तो दिया कि यह तेरे जानने की बात नहीं है। फिर आलिया ने अपनी मम्मी से कुछ नहीं पूछा। अपनी मम्मी से फ़ोन लिया और अपने दोस्त टीना को फ़ोन करने लगी।

टीना उसकी गली के बाहर वाली गली में रहती है। उसने टीना से कहा, यार आज तू  स्कूल क्यों नहीं आई! स्कूल में आज बहुत मज़ा आया। टीना ने कहा अच्छा कोई बात नहीं, आज मेरी बहुत तबीयत ख़राब थी इसलिए मैं स्कूल नहीं आई। मम्मी ने कहा छुट्टी कर लो तो मैंने छुट्टी कर ली। आलिया ने कहा, अच्छा ठीक है, तू एक काम कर तू मेरे घर पर आ जा। हम यहीं बैठकर स्कूल का काम करेंगे या फिर कुछ खेलेंगे।

टीना ने कहा, नहीं! आज मैं उस गली में नहीं आ सकती। वहाँ जो कुछ हुआ है उसे देखकर मेरी मम्मी ने कहा है कि आज से तू उधर नहीं जाएगी। बस स्कूल जाएगी और स्कूल से सीधे ट्यूशन। वहाँ भी मैं तुझे छोड़ने चलूँगी। आलिया ने कहा, हुआ क्या है गली में! मुझे भी तो पता चले कि आज गली में क्या हुआ? मेरी मम्मी टाल-मटोल कर रही हैं, कुछ बता भी नहीं रही है। बस कह रही हैं कि तेरे जानने की चीज़ नहीं है।  

टीना ने कहा, यार सही कह रही है तू! मेरी मम्मी भी मुझे ज़्यादा देर ग्रिल पर खड़ा नहीं होने दे रही। बार-बार अंदर बुला ले रही है। गली में भी तो देख, एक भी लड़की दिखाई नहीं दे रही, लगता है कि माहौल देखकर सबने अपनी-अपनी लड़कियों को अंदर बैठा लिया है।

आलिया ने बड़ी ही उत्सुकता से पूछते हुए कहा, यार तू ही बता कि आज गली में क्या हुआ है? रुक जा, मैं बता रही हूँ कि क्या हुआ है? टीना ने आवाज़  को हल्का करते हुए कहा, पता है जो तेरे घर के बगल वाला घर है ना जहाँ वह आंटी रहती हैं, क्या नाम है ‘करिश्मा’ जो अधेड़ उम्र की हैं। कल उनकी बड़ी वाली लड़की अपने पसंद के लड़के के साथ चली गई। जब यह बात गली में सबको पता चला तो सबने अपनी-अपनी लड़कियों पर पाबंदी लगा दी कि तुम्हें वहाँ नहीं जाना, तुम्हें वह नहीं करना। तुम्हें तैयार नहीं होना और यहाँ तक की स्कूल भी तुम्हें हम ही छोड़ कर आएँगे।

आलिया को अब सारी बात समझ में आई कि उसकी मम्मी उसे यह बात क्यों नहीं बता रही थी? शायद सारे पैरेंट्स के मन में यह डर बैठ गया है कि हमारे साथ भी कुछ ऐसा ना हो जाए। यह बात बताने के बाद टीना ने फ़ोन काट दिया। 

आलिया सोचने लगी कि मुझे गली में जाकर देखना चाहिए कि क्या हो रहा है। औरतें कैसी-कैसी बातें कर रही हैं। उस वक़्त तो मुझे पता नहीं था कि क्या हो रहा है। मुझे जाना चाहिए। उसने अपने स्लीपर पहनी और बिना आहट किए गली की ओर बढ़ने लगी। उसकी मम्मी सो चुकी थी। नहीं तो शायद दूसरों की तरह उसकी मम्मी भी गली में जाने से रोक देती। वह चुपचाप अपनी सीढ़ियों पर बैठकर सामने बैठी औरतों की बातें सुनने लगी।

कमला आंटी जो कुछ देर पहले ड्यूटी से आई थीं। कहने लगीं, अरे अगर एक लड़की ने ऐसा किया है तो सारी लड़कियाँ थोड़े ना ऐसा करेंगी, जो सारे पेरेंट्स अपनी लड़कियों पर पाबंदियाँ लगा रहे हैं। और वैसे भी उसने कुछ ग़लत क्या किया है। बस उसकी इतनी ग़लती है कि उसे अपने घर में बता देना चाहिए था या घर में किसी बड़े की सलाह ले लेती।

कमला आंटी के बगल में बैठी सोनिया आंटी कहने लगी, गली कैसे सुनसान लग रही है। जब बच्चे खेलते हैं तो चहल-पहल होती है तब लगता है कि गली ज़िंदा है। जब ऐसा कोई हादसा होता है तब हम 19वीं सदी में चले जाते हैं। वक़्त के साथ हम अपने-आपको बदलने की कोशिश नहीं करते!

आलिया समझ चुकी थी कि गली में कुछ लोग इसके ख़िलाफ़ हैं तो कोई फेवर में भी है। यह सब बातें सुनने के बाद वह वापस अपने घर आ गई। जीने से बिना आहट करते हुए चढ़ी और जाकर बेड पर लेट गई।

कुछ दिन बीतने के बाद माहौल फिर पहले जैसा हो गया। लड़कियाँ फिर से बाहर निकलने लगीं। बच्चों की चहल-पहल भी होने लगी। धीरे-धीरे लोग इस घटना को भूल गए।

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