इंस्टाग्राम : शक-ओ-सुब्हा / महकनूर

इंस्टाग्राम एक ऐसी चीज़ है जिसे लड़का हो या लड़की सब चलाना पसंद करते हैं। कोई छुप कर चलाता है तो कोई खुलेआम। वैसे तो लड़कियाँ छुप कर ही चलाती हैं। एक बार मेरी दोस्त स्कूल से आई, उस वक़्त क़रीब चार बज रहे थे। मैं छत पर थी, तभी उसने कहा कि तेरा फ़ोन कहाँ है? मैंने पूछा क्यों? उसने कहा कि इंस्टाग्राम पर अपनी आईडी निकालूँगी। मैंने कहा मैं तो इंस्टाग्राम चलाती नहीं हूँ और मेरे फ़ोन पर इंस्टाग्राम है भी नहीं।

डाउनलोड कर लेते हैं! पर मुझे आईडी बनानी नहीं आती। वह बोली, ‘अरे बहुत आसान है, ला मैं बना दूँ ! मैंने अपनी आईडी खुद ही बनाई हुई है।’ मैंने कहा, ‘यार किसी ने देख लिया तो?’ उसने कहा, ‘अरे कुछ नहीं होगा? मैं भी तो चलाती हूँ और अभी तक किसी को पता भी नहीं चला।’ मैंने कहा कि तू छुप कर क्यों चलाती है? अरे तू इतने सवाल मत कर, ला इधर दिखा मैं तेरी आईडी बनाऊँ! सबसे पहले वो प्ले स्टोर पर गई और बटन को दबाया और इंस्टाग्राम कहा। इंस्टाग्राम सर्च होने लगा।

इंस्टाग्राम पर्पल और पिंक कलर का था। उसके साथ और भी ऐप आए जैसे, फेसबुक, स्नैपचेट, व्हाट्सऐप आदि। इंस्टाग्राम डाउनलोड होने लगा तभी मेरी दोस्त कहने लगी कि तू स्नैपचेट तो चलाती है ना! मैंने कहा कि नहीं मैं फ़ोटो खींचती हूँ, नए-नए फिल्टरों पर फिल्टर को डाउनलोड करती हूँ और इसके अलावा कुछ भी नहीं करती। मेरी दोस्त डायलॉग बोलते हुए बोली कि मतलब तू दुनिया की अकेली लड़की है जो ये सब नहीं चलाती है। वैसे तो तू पढ़न्तु भी नहीं है?

बातों-बातों में इंस्टाग्राम भी डाउनलोड हो गया। जब उसपर क्लिक किया तो दो ऑप्शन आए साइनिंग या न्यू अकाउंट। उसने कहा कि बता साइनिंग करूँ या न्यू अकाउंट। मैंने कहा कि साइनिंग कर। एक और ऑप्शन आया अपना फ़ोन नंबर लिखो। फिर हमने अपना फ़ोन नंबर डाला और इन कर दिया। मैंने अपनी दोस्त से कहा कि लोग कितनी मेहनत करते हैं इंस्टाग्राम चलाने के लिए। वह बोली, कहाँ मेहनत लग रही है। ये चीज़ें तो डालनी ही होती है। आज मैं तुझे इंस्टाग्राम पूरा सीखा कर ही जाऊँगी। फिर उसने बाक़ी चीज़ें डाली और आख़िर में डीपी डाली। डीपी में उसने वॉलपेपर लगा दिया। फिर बोली, ले तेरी भी आईडी बन गई। मैंने उससे कहा इतना दिमाग़ कहाँ से लाती है!

यू-ट्यूब जिंदाबाद! तुझे जो कुछ खोजना हो उसे यू-ट्यूब पर डाल दे, ख़ुद ही कितनी सारी वीडियो आ जाएगी।

समय देखा तो पाँच बज रहे थे। वो बाय बोलकर अपने घर लौट गई। फिर मैं फ़ोन की सेटिंग पर गई, वहाँ से इंस्टाग्राम हिंड कर दिया। लंबी साँस ली और नीचे कमरे में जाकर लेट गई। कुछ देर बाद इंस्टाग्राम के शॉर्ट वीडियो के मैसेज़ दिखे। फिर मैंने सेविंग में जाकर हिड में जाकर इंस्टाग्राम ओपेन किया और शॉर्ट वीडियो देखने लगी। दस-पंद्रह मिनट तक मैंने शॉर्ट वीडियो ही देखी। फिर मैं और चीज़ों को देखने लगी। मैंने सर्च बटन दबाया तो देखा सबकी आईडी आ रही है। उनमें मेरे चाचा, मामा, ताऊ और बहुत सारे लोग थे। पहले तो मैंने किसी को मैसेज नहीं किया पर कुछ देर बाद मैंने मामा के लड़के को हाय लिखकर भेज दिया। उस वक़्त वो भी ऑनलाइन था उसने हैलो बोलते हुए लिखा, कौन? मैंने कहा गेस करो! वो कहने लगा कि मेरा कोई दोस्त ही होगा। नहीं! फिर भाई तू कौन है? मैंने कहा कि मैं महक हूँ। उसने चौंकनेवाली इमोज़ी भेजा।

इतना क्यों चौंक रहा है? उसने कहा कि तेरे मम्मी-पापा को पता है कि तू इंस्टाग्राम चला रही है।

उसके इस मैसेज का जवाब न देकर मैंने फ़ोन बंद कर दिया। मुझे थोड़ी-सी घबराहट होने लगी। मन में नए-नए ख़याल आने लगे। नौ बज चुके थे। मैं फ़ोन चार्ज़ में लगाकर बैठी ही थी कि फ़ोन की घंटी बजने लगी। मैं सोचने लगी कि कहीं उसने अपनी मम्मी यानी मामी को तो नहीं बता दिया। पास जाकर फ़ोन देखा तो सच में मामी का फ़ोन था। मैंने फ़ोन को स्पीकर पर डाला। मामी ने अम्मी को सलाम किया। अम्मी ने उनका सलाम लिया और पूछा, सब ठीक है? मामी ने कहा कि यहाँ पर तो सब ठीक है पर लगता है तुम्हारे यहाँ कुछ ठीक नहीं है।

अम्मी बोलीं ऐसा क्या हो गया जो कुछ ठीक नहीं है! उन्होंने कहा कि पूरे ख़ानदान में एकमात्र तुम्हारी लड़की पढ़ाई कर रही है और तुम उसे फ़ोन भी चलाने दे रही हो। तुम्हें पता है तुम्हारी लड़की इंस्टाग्राम चला रही है। अम्मी ने कहा तो क्या हो गया? यह सुन मैंने लंबी साँस ली ही थी कि मामी ने फ़ोन काट दिया। अम्मी ने मुझे आवाज़ लगाई। मैं डरते-डरते उनके पास गई। अम्मी कहने लगीं, ये क्या तुम इंस्टाग्राम चला रही है। यहाँ हम तुझे पढ़ा रहे हैं, वो बहुत नहीं है क्या?

अम्मी इंस्टाग्राम तो यू-ट्यूब की तरह है। उसमें भी शॉट वीडियोज़ चलती है, जैसे व्हाट्सऐप पर हम बात करते हैं। और ऐसे भी मैं किसी से थोड़े बात करती हूँ। अम्मी ने फ़ोन मँगवा कर इंस्टाग्राम डिलीट करवा दिया। अंदर जाते हुए मैंने कहा कि अब तो तुम खुश हो! इंस्टाग्राम चला कोई और रहा है और आग किसी और को लग रही है। टाइम देखा तो दस बज रहे थे। मैं सोचने लगी कि अम्मी ये बात पापा को भी ज़रूर बताएगी।

मैं खिड़की के पास जाकर खड़ी हुई और मेरी नज़र वहाँ गई जहाँ मेरे पापा गाड़ी खड़ी करते हैं। तभी पापा आ गए। ये देख मैं सोचने लगी कि पापा को भी आज ही जल्दी घर आना था। मुझे बहुत ज़्यादा डर लगने लगा। मेरे हाथ कँपकँपा रहे थे। ऊपर कमरे में आकर पापा बेड पर बैठ गए। तभी उन्होंने मुझे बुलाया। मैंने डरते-डरते अपने क़दम बढ़ाए। पापा ने कहा कि ले फ़ोन चार्ज़ पर लगा। मैंने फ़ोन चार्ज पर लगाया ही था कि तभी फ़ोन बजा। जब मैंने देखा तो फ़ोन मामी का ही था। मैं थोड़ा डर गई लेकिन अपने डर को दूर करते हुए चार्ज़र से फ़ोन निकाला और मामी को सलाम करते हुए कहा कि मामी आपको क्या चुल मच रही है। मैं इंस्टाग्राम चलाऊँ या ना चलाऊँ आपको क्या! क्या आपका लड़का नहीं चलाता इंस्टाग्राम। जब देखो मुझे टोकती रहती हो। ये कह मैंने फ़ोन काट दिया।

इसके बाद उनका फ़ोन फिर नहीं आया।

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