आज टीचर नहीं आई / साहिना
साक्षी ओए साक्षी! तू तैयार हो गई!
हाँ! रुक मैं आती हूँ। बहन तू तो आज लेट करवा के मानेगी, चल, अब जल्दी चल।
29 ब्लॉक और 19 ब्लॉक के बीच चौड़ी सड़क से जब हम स्कूल जा रहे थे तब शौचालय के सामने रखे कूड़ेदान से सफ़ाई कर्मचारी कूड़े निकाल रहे थे, वहीं दूसरी तरफ़ एक महिला सफ़ाईकर्मी झाड़ू लगा रही थी। पॉपुलर स्वीट वाले दुकानदार अपनी ब्रेड-पकौड़े, समोसे की दुकान खोल रहे थे ताकि सुबह में जल्दी काम पर आने-जाने वाले लोग यहाँ समोसे पैक करवा करके ले जाएँ।
जब हम वहाँ से गुज़रे तो समोसों के तले जाने की सौंधी-सी खुशबू आई। साक्षी ने बोला ‘ओए आराध्य! आज एसएसटी का टेस्ट है, तूने चैप्टर याद कर लिया न! मैंने तो कुछ नहीं पढ़ा। सुन अगर एसएसटी वाली मैडम नहीं आईं तो मेरी तरफ़ से तुझे समोसे।’ मैंने कहा हाँ, ‘ज़रूर पहले पहुँच तो जाएँ।’ साक्षी बोली, ‘अरे बस! हम पहुँच गए।’ प्रार्थना शुरू हो चुकी थी, और हर रोज़ की तरह हमें आज भी लेटकमर वाली लाइन में खड़ा होना पड़ेगा। मैंने साक्षी से कहा बहन तू रोज़ लेट करवाती है। तेरी वजह से मुझे भी पूरे ग्राउंड के पाँच चक्कर लगाने पड़ेंगे।
प्रार्थना होते ही पहले पीरियड की पहली घंटी बजी। सब बच्चे लाइन बनाते हुए अपनी-अपनी क्लासरूम की ओर भागे, और हमने ग्राउंड में चक्कर लगाना शुरू किया। साक्षी बोली यार आज तो पीछे बैठना पड़ेगा और ऊपर से पहला पीरियड एसएसटी का है, उसका टेस्ट अलग से है। हम जब अपनी ग्यारहवीं के क्लासरूम में पहुँचे तो मॉनिटर तानिया ब्लैकबोर्ड पर आज की तारीख़ और सब्जेक्ट पीरियड लिख रही थी।
सब अपनी नोटबुक और बुक निकाल रहे थे। हम दोनों लास्ट बेंच पर जा कर बैठ गए। पूरी क्लास में बातों की हल्की-हल्की फुसफुसाहट की आवाज़ आ रही थी। हम सब सोच रहे थे कि मैम बस आती होंगी - कंधे पर पर्स टाँगे, हाथ में अटेंड्स रजिस्टर लिए, आँखों पर गोल चश्मे लगाए।
साक्षी मन ही मन सोच रही थी, हे भगवान कुछ भी हो, बस आज मैम ना आए फिर तो मजे ही मजे हैं। और फिर और दिन की तरह ही माहौल हो रहा। तभी मॉनिटर तानिया ने बोला सब चुप हो जाओ आज एसएसटी (sst) वाली तृप्ति मैम नहीं आई हैं और ये पीरियड फ्री है। सब अपनी-अपनी बुक खोल के रीडिंग करो, जब तक साइंस वाली मैम आती होंगी। ये सुन साक्षी के चेहरे पर लम्बी मुस्कान आ गई। उसके मुँह से निकला येह... मैम नहीं आईं, अब तो आराध्या तुझे समोसे खिलाने पड़ेंगे। मैंने कहा, ‘हाँ, कोई नहीं, वो तो मैं तुझे वैसे भी खिला देती।’
हम दोस्तों ने पहले अपनी एसएसटी की बुक को बैग में डाला। शगुन, सिमरा से पूछने लगी बहन लंच में क्या लाई है? तभी मॉनिटर तानिया फिर चिल्लाई, ‘शोर मत मचाओ, नहीं तो मैं सबका नाम ब्लैकबोर्ड पर लिखने लग जाऊँगी। और मैम को भी ख़ुद बुला लाऊँगी।’ एकदम से सब चुप हो गए।
फिर पीछे की बेंच से हँसी की आवाज़ आई, ‘लगता है आज पीरियड फ्री ही जाएगा तभी तो अभी तक साइंस वाली मैम भी नहीं आईं? तानिया! सुन ना गेट बंद कर दे, जब कोई आएगा तो देखा जाएगा। हमारी क्लास बिल्डिंग के कॉर्नर पर है—प्रिंसिपल रूम और स्टाफ़ रूम से दूर। वहाँ तक आवाज़ भी नहीं जाएगी। कभी-कभी तो ऐसे मौक़े मिलते हैं, चल ना मजे करते हैं।’
जैसे-तैसे सभी ने तानिया को राजी कर ही लिया। रूम का दरवाज़ा हमने बंद किया। बस फिर क्या था हम सब अपनी-अपनी बातें करने लगे। मोनिका बैंच पर ही ढोल बजाने लगी। सिमरा गाना गुनगुनाने लगी तो कुछ लड़कियाँ सोल्हा पर्चीदाप खेलने लगी। कुछ लड़कियाँ नोटबुक का काम कम्पलीट करते हुए बात कर रही थीं। जैसे ही क्लास में शोर बढ़ता तानिया तेज़ आवाज़ में बोलती अरे इतना भी शोर मत मचाओ कि साथ वाले क्लास की मैडम यहाँ आ जाएँ।
पूरी क्लास को मज़े करता देख ऐसा लग रहा था कि काश! हर रोज़ पहले पीरियड में मैम ना आएँ, हम सब यूँ ही खुल कर बातें करे और अपनी मनमर्ज़ी कर पाएँ क्योंकि स्कूल में हम सबको बात करने का टाइम ही नहीं दिया जाता। एक लंच होता है उसमें बातें करें या खेलें। रिया मजे में बोली, आराध्या! तू कहे तो रोज़ एक पीरियड बातों का ही लगवा दूँ। उसकी बात पर हम ठहाके लगाने लगे।
अचानक मॉनिटर ने डाँट लगाई ‘चुप रहो सब! अगर प्रिंसिपल आ गईं तो किसी की ख़ैर नहीं।’ थोड़ी देर को फिर शांति छा गई। हल्की-हल्की फुसफुसाहट शुरू हो गई। साक्षी ने बोला यार तानिया अपनी हिटलरपंथी से तू बाज नहीं आएगी। तभी दरवाज़ा खुला। सारी क्लास एकदम चुप होकर सीधी बैठ गई। साइंस वाली मैम आईं। सबने उनको ‘गुड मॉर्निंग’ विश किया। मैम ने बैठते ही बोला, ‘आज तुम्हारी मैम नहीं आई। तानिया तुम सबकी अटेंड्स लो और बाकी सब कॉपी निकालो।’
सारे स्टुडेंट एक-दूसरे को देखने लगे। सबके चेहरों पर मुस्कान आ गई। मोनिका मेरे कान में बोली, ‘अरे जब तक मैम चैप्टर शुरू करवाएँगी तब तक ये पीरियड ही ख़त्म हो जाएगा।’ और हुआ भी यही - तानिया ने अटेंड्स ली, मैम ने पढ़ाना शुरू किया तब तक बेल बज गई। थोड़ी देर का जो सन्नाटा था वो फिर ख़त्म हो गया और नए पीरियड के इंतज़ार का माहौल बनने लगा।

