मेकअप के लिए दौड़ भाग / खुशनुमा
अक्टूबर का महीना आ रहा था और हवा में थोड़ी ठंडक घुलने लगी थी। धूप में ज़्यादा देर खड़े होना भी बुरा नहीं लग रहा था। चाची के लड़के का रिश्ता पक्का हो गया था। मैंने अम्मी से पूछा, अम्मी साज़िद भईया का रिश्ता पक्का हो गया लेकिन इनकी शादी कब होगी? अम्मी बोली कि शादी तो सर्दियों के बाद ही होगी।
हम लोग सुंदर नगरी में रहते हैं और यहाँ अलग-अलग हिस्से को उस जगह पर रहने वाले लोगों के द्वारा किए जाने वाले काम की वजह से जाना जाता है। यहाँ रहने वाले परिवार दैनिक मज़दूरी व खानदानी काम करते हैं। हमारी गली भट्ठियों वाली गली के नाम से जानी जाती है। सर्दियों के मौसम में यहाँ रहने वाले लोग मूँगफली भूनने के बाद उसे पैक कर बाहर ले जाने का काम करते हैं। हमारे घरों में शादी सीजन ख़त्म होने के बाद होती है।
काम शुरू होने से पहले तक अम्मी-अब्बू कपड़े तो दिला देंगे लेकिन हमें तैयार कौन करेगा, यह बात मेरे दिमाग में आई। मैंने सिमरन, निकहत, आलिया, समन, अनम इन सबको बुलाया। फिर मैंने उन सबसे कहा, “बहन साज़िद भइया का रिश्ता पक्का हो गया है। लेकिन तुमको पता है न हम लोगों की एक जैसी प्रॉब्लम है।” उन्होंने कहा, ‘हाँ!’ मैंने कहा “कौन-सी प्रॉब्लम?”
वो लोग एक साथ बोले, “बहन हमारी बड़ी बहनें हमें मेकअप करना नहीं सिखातीं और हमारे पास मेकअप के सामान भी नहीं होता।” मैंने कहा, “आज तो शनिवार है क्यों न हम सब अपनी-अपनी गुल्लक से सौ-सौ रुपये निकाल कर मेकअप का सामान ले आएँ।” वे सब बोले, “हाँ बहन सौ रुपये ही तो ख़र्च होंगे!” मैंने कहा, “सब ले आना, शाम 6.30 बजे यहीं पर मिलना।”
हम सब 6.30 बजे वहीं पर मिले। मैंने कहा पता है न इन पैसों का क्या करना है? वे सब बोले, “बहन इन पैसों से मेकअप का सामान लाना है।” निकहत बोली कि बहन मैंने तो अपने फ़ोन में वॉटरप्रूफ़ फाउंडेशन देखा है, मैं तो वही लेकर आऊँगी। मैंने कहा, “अरे उस फाउंडेशन का नाम पता है?” उसने कहा, “नहीं!” मैंने कहा, “तो ऐसे कैसे मिल जाएगा फाउंडेशन!” वो बोली, “बहन मैंने जैसा फ़ोन में देखा है उसकी तरह ही ले आऊँगी न!” फिर मैंने भी कहा, “बहन मैंने भी टीवी में देखा है, एक साउथ कोरिया की लिपिस्टिक! उसका शेड मुझे बहुत अच्छा लगा।” तभी सिमरन बोली, “चल! तू तो पूरी साउथ कोरियन है पूरे दिन वहीं की बात करती रहती है।”
हमारे घर की घटनी से बाहर बिल्कुल सामने ही शनिबाज़ार लगता है। शनिबाज़ार में लोग बहुत दूर-दूर से सामान ख़रीदने आते हैं। हम स्कूल के सामने गए। मैंने सबको बुलाया और कहा, “अरे इधर आओ!” वो सब मेरे पास आकर बोले, “क्या है? क्यों चिल्ला रही है?” मैंने कहा, “बहन देख यहाँ तीस-तीस रुपये में वॉटरप्रूफ़ मेकअप मिल रहा है।”
मैंने अपने हाथ पर फाउंडेशन लगाया और उन सबसे कहा कि मैं इस पर प्याऊ से पानी डाल कर देख लूँ।”
“अच्छा! चल जा!” मैंने प्याऊ से फाउंडेशन के ऊपर पानी डाला तो वह सच में वॉटरप्रूफ़ था। मैं भाग कर उनके पास गई और बोली, “बहन ये फाउंडेशन वॉटरप्रूफ़ है, ये देख।” वो बोली, “तू तो सही कह रही है।” आलिया उस फाउंडेशन की डेट देखने लगी। उसने कहा, “बहन ये तो एक्सपायर्ड है।”
तभी मेरी दोस्त जो मुझे बाज़ार में मिली। उसके सामने यही कहा कि मुझे एक्सपायरी डेट से कोई फ़र्क नहीं पड़ता। वह बोली, “अच्छा! जब मुँह पर मोटे-मोटे दाने निकलेंगे तब पता चलेगा एक्सपायरी डेट का क्या मतलब होता है।” मैंने कहा, “अरे हाँ! ये तो मैंने सोचा ही नहीं। एक और दुकान है वो यहीं गोसिया मस्जिद के सामने है, वहाँ भी तीस-तीस रुपये का मेकअप मिलता है।”
फिर हम लोग दूसरी दुकान पर गए वहाँ पर तो और भी भीड़ थी। वहाँ पर फांउडेशन का अलग ढेर, लिपिस्टिक का अलग, सारे मेकअप के सामान का अलग-अलग ढेर लगा था। मैं फांउडेशन के ढेर से एक-एक करके अपनी पसंद का फांउडेशन देखने लगी। निकहत भी मेरे साथ अपने रंग का फांउडेशन देख रही थी।
आलिया लिपिस्टिक देख रही थी। उसने बहुत सारे शेड अपने हाथ पर लगा रखे थे। उसने मैरून कलर की लिपिस्टिक ले भी ली। सिमरन ने अपने चेहरे पर मैच होनेवाला प्राइमर लिया। निकहत और मैंने अपने-अपने रंग का फाउंडेशन लिया। हम लोगों ने और भी सारा सामान ले लिया। तभी सनम बोली, “बहन बस ये तीन चीज़ें, आइसेट, ब्लशर, गद्दी कुछ भी नहीं लिया। चल ये दो चीज़ ले लेते हैं, आइसेट तो हम लिपिस्टिक से बना लेंगे।”
सबने अपने-अपने सामान का हिसाब लगाया। हम सबके सौ रुपये हो गए थे। हम लोग वहाँ से वापस आ ही रहे थे कि एक अनजान महिला जो देखने में पढ़ी-लिखी लग रही थी, बोली, “बेटा, आप सभी कितने साल के हो?” हम सब एक साथ बोले, “हम सब बारह साल के हैं।” उन्होंने कहा, “बारह साल की हो, और ये मेकअप का सामान ऐसे छाँट कर ले जा रही हो जैसे कोई बड़ी उम्र की लड़की हो।”
मैं जैसे ही अपने घर में घुसी तो देखा कि घर में कोई नहीं है। मैंने बराबर वाली भाभी से पूछा कि मेरे घर के सारे लोग कहाँ चले गए? उन्होंने कहा, “सब लोग दूसरेवाले घर में सोने गए हैं।” मैंने कहा, “इतनी जल्दी? अभी तो सिर्फ़ आठ बजे हैं।“ उन्होंने कहा, “तुमने मुझसे पूछा, मैंने तुम्हें बता दिया। इसके आगे मुझे कुछ नहीं पता।”
मैं वहाँ से सिमरन के घर गई। देखा तो उसके पापा घर पर ही थे। मैंने उसे इशारे से बुलाया। वो इशारे में ही बोली कि तू अपने घर जा, मैं अभी वहाँ आ रही हूँ। थोड़ी ही देर में वो नीचे आ गई। आते ही बोली, “क्या है?” मैंने कहा, “अंदर तो आ! देख मेरे घर में कोई नहीं है।” वह बोली, “तो क्या करूँ?” मैंने कहा, “एक बार मेकअप ट्राई करके देखें?” उसने कहा, “ठीक है चल सबको बुला ले।”
मैं वापस सिमरन के घर गई उसकी बहन निकहत को बुलाने। निकहत जल्दी-जल्दी जीने से उतरी और बोली, “कहाँ है मेरी फ्रेंड?” मैंने कहा, “नीचे आ।” वो जीने से नीचे उतर कर आई। मैंने कहा, “जा तू अपने घर से अपना और सिमरन का मेकअप का सामान लेकर आ। हम अपने-अपने मेकअप को ट्राई करके देखेंगे।” उसने कहा, “ठीक है अभी आई।” आलिया ने भी यही कहा, “तू चल, मैं आती हूँ।”
कुछ ही देर में सब मेरे घर आ गए। सब अपने मेकअप के सामान से मेकअप करने लगे। मैं उठी और कमरे की कुंडी लगा दी। मैंने पहले अपनी एक उंगली से मुँह पर फाउंडेशन लगाया फिर गर्दन उठाई और उस गद्दी से फाउंडेशन सेट किया फिर मैंने पाउडर लगाया, फिर हरी वाली लिपिस्टक गालों पर लगाई और उसे सेट करने लगी। मेरे गाल लाल हो गए और जब लिपिस्टिक अपने होंठो पर हल्की-हल्की लगाई और उसी लिपिस्टिक को अपनी आँखों पर लगाई तो मेरी पलकें भी गुलाबी हो गईं।
मैंने उन सबसे कहा, “बहन देखो मैंने अपना मेकअप कर लिया।” उसने कहा, “बहन तेरा मेकअप बहुत अच्छा लग रहा है। तूने बिना आईने के इतना अच्छा मेकअप कर लिया।” फिर मैंने कहा, “जल्दी-जल्दी मेकअप कर लो वरना अभी मेरी बहन मुझे बुलाने आ जाएगी।”
कुछ ही देर में उन लोगों ने भी अपना मेकअप कर लिया। मैंने कहा, “यार तुम सब बहुत सुंदर लग रही हो। मैं बाहर पटिया पर खड़े होकर देखती हूँ कि मेरी बहन मुझे बुलाने आई या नहीं।” जैसे ही मैं देखने बाहर गई तो देखा मेरी बहन बाहर ही खड़ी थी। मैं झट से अंदर गई और उन सबसे कहा, “मेरी बहन बाहर ही खड़ी है जल्दी-जल्दी अपना मुँह धो लो।” मुँह धोने के लिए हम लड़कियों में से आधे गुसलख़ाने में और आधे किचन की तरफ़ भागे। हम सबने मुँह धोने के लिए टंकी खोली और धक्का-मुक्की करते हुए मुँह धोने लगे।
मुँह पर पानी मारा तो मेकअप नहीं छूटा। फिर मैंने स्लैब से साबुन उठाया और घिस-घिस कर मुँह धोने लगी। बड़ी मुश्किल से मेकअप छूटा। सबने एक साथ कहा कि अरे कहीं ऐसा न हो की शादी वाले दिन का मेकअप चार दिन तक छूटे ही न! सभी हँसने लगे।
निकहत बोली कि मेकअप रिमूवर भी तो आता है, वो भी ले लेंगे ।

