फ़ैशन के अनुकूल / मीनू
त्रिलोकपुरी 20 ब्लॉक के इंद्रा कैंप की पतली गलियों के बीच मौजूदा पार्क है। वहाँ पर मैं अपने दोस्त आशिया, साहिना के साथ खेल रही थी। पार्क के ठीक सामने तीसरी मंज़िल पर ही मेरा घर है। मैंने साहिना से कहा, “आज मंगल बाज़ार चलें?” उसने कहा, “हाँ चल तो सकते हैं लेकिन तुझे बताना होगा कि क्या लेना है?” मैंने कहा, “आजकल ऊपर से बाँधने वाली शॉर्ट कुर्ती चल रही है ना, वो लेने का मेरा बड़ा ही मन है। मैंने बहुत सारी लड़कियों को उसे पहने हुए देखा है।”
आशिया बोली, “तेरे घर के लोग उस तरह की कुर्ती पहनने देंगे?” मैंने कहा, “हाँ क्यों नहीं पहनने देंगे। उसमें क्या ख़राबी है। पहनने पर वो कुर्ती स्टाइलिस्ट और मस्त लगती है। अच्छा चल मैं मम्मी को बोल कर आती हूँ। अपनी बहन टीना से भी पूछ लेती हूँ, अगर उसे चलना होगा तो वो भी चल लेगी। साहिना तू भी रेडी होकर मुझे नीचे मिल, मैं भी जल्द ही तैयार होकर आती हूँ।”
मैं ऊपर गई तो देखा मम्मी रूई के गुल्ले वाला माल बना रही है। उन्हें देख मुझे लगा कहीं वह मुझे भी माल बनाने में न लगा दे। मैंने मम्मी से कहा, मैं साहिना के साथ मंगल बाज़ार जा रही हूँ उसे कुछ सामान लेना है। तभी टीना ने कहा, “चल मैं भी चलती हूँ।” मैंने कहा, “ठीक है पहले मैं अपने कपड़े चेंज कर लूँ।”
मैंने फोल्डिंग के साथ बनी पट्टी पर से हल्के लैवेंडर रंग का टॉप निकाला। उसके ऊपर सफ़ेद स्कार्फ़ को रोल करके गले में डाल लिया और नीचे स्किन ब्लू जींस पहनी। बालों को नीचे से खुला छोड़ उसमें एक कलचर लगाया और स्कूल बैग में रखे अपने छोटे गुलाबी पर्स को निकाला। मुझे शुरू से ही पर्स में पैसे रखने की आदत रही है।
स्कूल जाते समय मम्मी रोज़ केले खाने के लिए मुझे दस रुपये देती है और पापा रिक्शे के लिए दस रुपये देते हैं। मैं उस दस रुपये का कुछ खा लेती हूँ और दस रुपये बचा भी लेती हूँ। मैंने सोचा मेरा पैसे बचाना आज काम आ गया। अब इन्हीं पैसों से वो कुर्ती और बाक़ी सामान लूँगी।
साहिना की आवाज़ आई - मीनू। मैंने खिड़की से नीचे देखा तो उसने ब्लैक क्रॉप टॉप, हाई वेस्ट डेनिम वाली जींस और हल्की लिपस्टिक लगा रखी थी। मैंने सोचा ओह हो आज तो साहिना भी मस्त लग रही है. शाम सात बजे मैं, साहिना और टीना अपने हाथ में फ़ोन लिए 27 ब्लॉक के मंगल बाज़ार जाने के लिए निकल पड़े। गली के बाहर खटिया पर बैठी अम्मा ने बोला भी मीनू, इतनी तैयार होकर कहाँ जा रही हो। हमने कहा, ‘बाज़ार जा रहे हैं अम्मा।’
वैसे तो हम मेकअप का सामान बुध बाज़ार से लेते हैं। टीना बता रही थी कि बुध बाज़ार में मेकअप के सामान अच्छे मिलते हैं और मंगल बाज़ार में कपड़े सस्ते। यहाँ के ज़्यादातर दुकानदार सदर और गाँधी नगर की मार्किट से होलसेल के रेट पर कपड़े और मेकअप का सामान लाते हैं जो हमें कम और सस्ते दाम में मिल जाते हैं।
20 ब्लॉक इंद्रा-कैंप से निकल हम चौड़ी सड़क पर पहुँचे जो 27 ब्लॉक की मंडी की तरफ़ जाती है। जब हम इस रोड पर आए तो एक महिला बड़ा पाव बना रही थी, जिसकी तीखी खुशबू से मेरा मन भी बड़ा पाव खाने को होने लगा। हम थोड़ा आगे बढ़े तो आसपास लगी सब्ज़ी की रेहड़ियों से अलग-अलग महक आ रही थी। एक दुकान से आवाज़ आई ‘पेटीएम पर सौ रुपये प्राप्त हुए।’
हम 27 ब्लॉक के मेन चौक पर पहुँचे जहाँ से मंगल बाज़ार लगना शुरू हो जाता है। कार्नर पर लगी समोसे की दुकान में गरमा-गरम समोसे को तलता हुआ देख मेरे मुँह में पानी भरने लगा। बाज़ार में काफ़ी भीड़ थी। भीड़ को देख ऐसा लग रहा था जैसे आधे त्रिलोकपुरी के लोग बाज़ार में आ गए हैं। हम भी किसी तरह उस भीड़ में घुस गए। टीना ने सबसे पहले तीन-चार रंग-बिरंगे बटरफ्लाई वाले क्लचर निकाले। साहिना ने क्लचर लेते हुए कहा कि टीना पहले तुझे जो चीज़ लेनी है वो ले ले, वरना सारे पैसे इन छोटी-छोटी चीज़ों में ख़त्म हो जाएँगे, और तुझे पता भी नहीं चलेगा।
थोड़ा आगे बढ़े तो हमने देखा एक दुकान पर सुंदर-सुंदर क्रॉप-टॉप, शर्ट और कोर्ट सेट मिल रहा है। मैंने टीना से कहा, “वो देख टॉप की दुकान! (जैसी हमें चाहिए) यहाँ तो कितने सुंदर-सुंदर टॉप हैं। चल ना! देखते हैं।”
टीना हर टॉप को हाथ में लेती और कपड़े को छूकर देखती। टीना की नज़र एक नीले क्रॉप टॉप पर गई। उसने उस टॉप को उतरवाया और कहा, “ये देख! ये रंग तुझ पर खूब खिलेगा।” मैंने खुद के लिए भी एक दो टॉप और देखे हैं, लेकिन अच्छा तो नीले वाला टॉप ही लग रहा है। हमने दुकानदार से पूछा, “वह कितने की है?” उसने कहा “तीन सौ रुपये की।” साहिना ने कहा, “अरे अंकल जी पिछले हफ़्ते हमारी सहेली ऐसा ही टॉप ढाई सौ रुपये में ले गई है।” यह सुन उन्होंने हमें वो टॉप ढाई सौ रुपये में ही दे दिया।
साहिना ने कहा, “मीनू, मुझे व्हाइट शूज लेने हैं, वो जींस पर अच्छे लगते हैं। मेरे पास फ्रॉक स्टाइल में लॉन्ग ड्रेस है, जिसे मैंने कहीं घूमने जाने के लिए रखा है। अगर शूज मिल गए तो वो ड्रेस और जींस दोनों पर चल जाएगा और अच्छा भी लगेगा।” मैंने कहा, “हाँ चल देखते हैं, मुझे भी किसी इंगेजमेंट में जाना है, तू अपने शूज मुझे पहनने के लिए दे देना। मैं सोच रही हूँ वहाँ क्रॉप-टॉप, पंडा वाला पेंडेंट और जींस ही पहन कर जाऊँ। साथ में आशिया का साइड वाला पर्स ले लूँगी ताकि सबसे अलग और स्टाइलिस्ट लगूँ।”
जब हम जूते-चप्पल वाले स्टॉल पर पहुँचे तो वहाँ तरह-तरह के शूज देख कर हम तीनों को ऐसा लगा कि हम सारे शूज एक साथ ही ख़रीद लें। हमने रेट पूछे तो कोई साढ़े चार सौ रुपये का था तो कोई साढ़े तीन सौ का। साहिना को इतने महँगे शूज नहीं चाहिए थी। हमने साढ़े तीन सौ वाले जूते का रेट तीन सौ में लगवाया, जो ऊँची एड़ी की थी और देखने में भी अच्छा लग रहा था। टीना शूज की दुकान के साथ लगी कॉस्मेटिक की दुकान पर लिपस्टिक को अपने हाथों पर लगा-लगा कर देख रही थी कि कौन-सा शेड अच्छा है।
साहिना हँसती हुई बोली, “बहन तूने इतने सारे शेड हाथों पर लगा कर देखे तब भी तुझे समझ नहीं आ रहा कि कौन-सा शेड लेना है, और कौन-सा नहीं। इतना समय तो हमें बाकी सामान लेने में भी नहीं लगा जितना तू एक लिपस्टिक लेने में लगा रही है । चल हमारा सामान पकड़ ले।”
सामान पकड़ने के बाद मैंने साहिना से कहा कि इसको लिपस्टिक लेने देते हैं, तब तक हम गोलगप्पे खा लेते हैं। हमने बीस रुपये के दो जगह गोलगप्पे मँगवाए। उन्होंने बीस रुपये के हिसाब से चार-चार प्लेट गोलगप्पे हमें खिलवाएँ।
आख़िरी गोलगप्पे खाते समय टीना भी टपक पड़ी। उसने मेरी प्लेट से एक गोलगप्पा खाया और पानी पिया। गोलगप्पे का स्वाद मुँह में लिए हम घर की ओर लौट चले।

